बायोप्सी

बायोप्सी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शरीर से ऊतकों (tissue) या कोशिकाओं (cells) का सैंपल लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है शरीर में कुछ विशेष तरह की बीमारियों के निदान के लिए बायोप्सी करायी जाती है। कुछ लोगों को बायोप्सी से डर लगता है लेकिन यह दर्दरहित एवं कम जोखिम वाली प्रक्रिया है। जानिए बीओप्सी क्या है, बायोप्सी क्या होता है, बीओप्सी मीनिंग इन हिंदी, बायोप्सी जांच, बीओप्सी टेस्ट कॉस्ट, बीओप्सी रिपोर्ट, लिवर बीओप्सी इन हिंदी, किडनी बायोप्सी क्या है के बारे में।

बायोप्सी अलग-अलग तरीकों से की जाती है लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि डॉक्टर को किस तरह के कोशिकाओं का परीक्षण करना है। बायोप्सी कराने का फायदा यह होता है कि इसमें उचित समय पर ही बीमारी का पता चल जाता है जिससे कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों का समय पर इलाज शुरू हो जाता है।

बायोप्सी कराने का उद्देश्य – Purpose of biopsy

कैंसर जैसी घातक और गंभीर बीमारी के निदान के लिए आमतौर पर बायोप्स का सहारा लिया जाता है। लेकिन अन्य बीमारियों की पहचान करने में भी बायोप्सी से काफी मदद मिलती है। बायोप्सी कराने की सलाह तब दी जाती है जब कोई महत्वपूर्ण उपचार शुरू करने से पहले अत्यधिक जानकारी की आवश्यकता होती है। बायोप्सी निम्न कारणों से की जाती है।

  • मैमोग्राम के माध्यम से स्तन में गांठ (lump) और कैंसर का पता लगाने के लिए।

  • त्वचा पर तिल के आकार के बदलते रहने के कारण मेलेनोमा की आशंका होने पर।

  • यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से हेपेटाइटिस से पीड़ित हो तब यह जानने के लिए कि उसे साइरोसिस (cirrhosis) है या नहीं।

  • कुछ मामलों में सामान्य दिखने वाले ऊतकों (tissue) की भी बायोप्सी की जाती है। इससे यह जानने में मदद मिलती है कि कैंसर शरीर में कितना फैल चुका है।

  • इसके अलावा ज्यादातर मामलों में बायोप्सी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।

बायोप्सी के प्रकार – Types of biopsy

बायोप्सी विभिन्न प्रकार की होती है। इनमें से लगभग सभी बायोप्सी में धारदार उपकरण से थोड़ी मात्रा में ऊतकों को निकाला जाता है। यदि त्वचा या किसी संवेदनशील क्षेत्र की बायोप्सी करनी हो तो उस क्षेत्र को सुन्न (numb) कर दिया जाता है। बायोप्सी निम्न प्रकार की होती है:-

  • बोन (Bone) बायोप्सी

    हड्डियों में कैंसर का पता लगाने के लिए इस प्रकार की बायोप्सी की जाती है। यह सीटी स्कैन (CT scan) तकनीक के माध्यम से या ऑर्थोपेडिक सर्जन द्वारा किया जाता है।

  • बोन मैरो बायोप्सी

    इस प्रकार की बायोप्सी में अस्थि मज्जा एकत्रित करने के लिए पेल्विस बोन (pelvis bone) में एक लंबी सूई प्रवेश करायी जाती है। यह ल्यूकीमिया और लिम्फोमा (lymphoma) जैसी रक्त से संबंधित बीमारियों का पता लगाता है।

  • लिवर बीओप्सी

    पेट की त्वचा के माध्यम में लिवर में इंजेक्शन दिया जाता है और लिवर के ऊतकों (tissue) को पकड़ा जाता है।

  • स्किन बायोप्सी

    इसमें पंच बायोप्सी मुख्य होती है। इसमें एक गोलाकार ब्लेड की मदद से त्वचा कोशिकाओं का बेलनाकार सैंपल लिया जाता है।

बायोप्सी के फायदे – Benefits of biopsy

  • नीडल बायोप्सी ऊतकों का सैंपल लेने का एक विश्वसनीय तरीका है जो कैंसर जैसी घातक बीमारी (fatal disease) का सही और सटीक तरीके से निदान करता है।

  • बायोप्सी पीड़ादायक नहीं होता है और परिणाम भी सही बताता है।

  • बायोप्सी में समय कम लगता है, मरीज की काटी गई त्वचा का घाव (skin injury) जल्द ही भर जाता है और वह पहले की तरह ही सामान्य हो जाता है।

  • महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के निदान के लिए बायोप्सी एक अनोखा तरीका है।