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जीवनशैली में आए बदलाव के कारण महिलाएं तेजी से स्तन कैंसर की चपेट में आ रही हैं। स्तन में किसी प्रकार की गांठ महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और मैमोग्राफी करवाएं। स्तन संबंधी हर परेशानी कैंसर नहीं होती है। ऐसी परेशानियां मासिक में बदलाव या फिर हार्मोनल डिसबैलेंस से भी हो सकती हैं। अत: डरे नहीं इसकी जांच के लिए किसी विशेषज्ञ से मिलें।

क्या है मैमोग्राफी तकनीक

मैमोग्राफी एक विशेष तरह का टेस्ट है, जिसमें एक्स-रे के जरिए स्तन की पूरी जांच की जाती है।इस जांच में स्तन कैंसर ही नहीं, छोटी-से छोटी गांठ या ट्यूमर तक का पता शुरुआती अवस्था में ही हो जाता है। मैमोग्राफी वास्तव में साफ्ट टिशू एक्सरे है जो स्तन में पाई जाने वाली कोशिकाओं ऊतकों और दुग्ध नलिकाओं की साफ तस्वीर दिखा कर बता सकता है कि उनमें कोई गांठ है या नहीं है। कई बार महिलाओं को स्तन कैंसर होने का पता काफी बाद में चलता है और इस स्थितिमें उनका इलाज हो पाना काफी मुश्किल हो जाता है। जिन महिलाओं में इसकी पहचान शुरुआत में हो जाती है, उनका इलाज करना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए आजकल चिकित्सक युवतियों को नियमित रूप से मैमोग्राफी करवाने की सलाह दे रहे हैं।

मैमोग्राफी की जरूरत क्यों

  • मैमोग्राफी से अत्यंत छोटे ट्यूमर या गांठ का पता शुरुआती अवस्था में ही चल जाता है।

  • मैमोग्राफी से महिलाओं में किसी भी प्रकार की स्तन की बीमारी की पहचान की जा सकती है।

  • महिलाओं को अगर उनके स्तन में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं और जांच करवाएं।

  • जिन महिलाओं की देर से शादी होती है या वे 30 साल के बाद पहली बार गर्भ धारण करती और बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं उन्हें मैमोग्राफी जरूर करानी चाहिए।

  • 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मैमोग्राफी बहुत जरूरी है क्योंकि उनमें स्तन कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

  • जो महिलाएं मोटी होती हैं या जो महिलाएं चिकनाई युक्त आहार का सेवन करती हैं, उन्हें खासतौर पर मैमोग्राफी करानी चाहिए।