कैंसर

कैंसर जानलेवा बीमारी है। कैंसर के मरीज जल्दी ठीक नही होते हैं क्योंकि इसके लक्षणों का पता देर से चलता है। कैंसर के विभिन्न प्रकार, सर्वाइकल कैंसर, ब्लैडर कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, स्तन कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, एसोफैगल कैंसर, पैंक्रियाटिक कैंसर, बोन कैंसर ब्लड कैंसर, आदि के बारे में जानिए इस केटेगरी में।

कैंसर के प्रकार :-

1. ओरल कैंसर :-

जब शरीर के ओरल कैविटी के किसी भी भाग में कैंसर होता है तो इसे ओरल कैंसर कहा जाता है। ओरल कैविटी में होंठ, गाल, लार ग्रंथिया, कोमल व हार्ड तालू, यूवुला, मसूडों, टॉन्सिल, जीभ और जीभ के अंदर का हिस्सा आते हैं। इस कैंसर के होने का कारण ओरल कैविटी के भागों में कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि होती है। ओरल कैंसर होने का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। ओरल कैंसर के कई कारण जैसे, तम्बाकू (तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला, पान, गुटखा) व शराब का अधिक तथा ओरल सेक्स व मुंह की साफ-सफाई ठीक से न करना आदि हैं। इसकी पहचान के लिये डॉक्टर होठों, ओरल कैविटी, फारनेक्स (मुंह के पीछे, चेहरा और गर्दन) में शारीरिक जांच कर किसी प्रकार की सूजन, धब्बे वाले टिश्यू व घाव आदि की जांच करता है। कोई भी जख्म या अल्सर आदि मिलने पर उसकी बायोप्सी की जाती है, इसके बाद एंडोस्कोपिक जांच, इमेजिंग इन्वेस्टिगेशन्स (कम्प्यूटिड टोमोग्राफी अर्थात सीटी), मैगनेटिक रिसोनेन्स इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासोनोग्राफी आदि की मदद से कैंसर की स्टेजेज का पता लगाया जाता है। इसका उपचार हर मरीज के लिए अलग हो सकता है।

2. स्तन कैंसर :-

  • स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये धारणा सही नहीं है।

  • भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में प्रति एक लाख में से तीस की औसत से इज़ाफ़ा हो रहा है।

  • यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं।

  • स्तन कैंसर को समझना आसान है, स्त्रियां खुद भी स्तन की जांच कर सकती हैं।

  • स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकर या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे (अंडर आर्म्स) भी गांठ होना स्तन कैंसर के संकेत हैं।

  • हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना पकड़ ले इसलिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने वज़न को नियंत्रित रखें, गर्भधारण का समय निश्चित करें और कम-से-कम 6 महीने तक बच्चों को स्तनपान ज़रूर कराएं. ऐसा करने से स्तन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है।

  • स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ़ 5-10 % महिलाओं में ही पाया जाता है।

3. बोन कैंसर :-

बोन कैंसर- बोन कैंसर या हड्डियों के कैंसर के लक्षण, बोन कैंसर के कारण, बोन कैंसर से बचाव के तरीके और बोन कैंसर की चिकित्सा, हड्डियों का कैंसर कई बार चोट या घाव के कारण भी होता है , ऐसे में हड्डियों की कमजोरी कई बार दर्द का कारण भी बन जाती है