कब्ज

कब्ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है।

प्रमुख कारण

  • कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर (Fibers) का अभाव।

  • अल्पभोजन ग्रहण करना।

  • शरीर में पानी का कम होना

  • कम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना।

  • कुछ खास दवाओं का सेवन करना

  • बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)

  • थायरॉयड हार्मोन का कम बनना

  • कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा

  • कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)

  • चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना।

  • गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना।

  • आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी।

  • दु:ख, चिन्ता, डर आदि का होना।

  • सही समय पर भोजन न करना।

  • बदहजमी और मंदाग्नि (पाचक अग्नि का धीमा पड़ना)।

  • भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात् जबरदस्ती भोजन ठूँसना। जल्दबाजी में भोजन करना।

  • बगैर भूख के भोजन करना।

  • ज्यादा उपवास करना।

  • भोजन करते वक्त ध्यान भोजन को चबाने पर न होकर कहीं और होना।

लक्षण

  • सासों की बदबू

  • लेपित जीब

  • बहती नाक

  • भूख में कमी

  • सरदर्द

  • जी मिचलाना

  • चहरे पर दाने

  • मुँह में अल्सर

  • पेट में लगातार परिपूर्णता