लेप्रोस्कोपी एक वरदान

अत्याधुनिक सर्जरी की विधा मरीजों को अधिक आराम और सहूलियतें पहुँचाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही हैं। आज अधिकांश मेजर सर्जरी दूरबीन पद्धति से की जा रही है। इस सर्जरी के बाद मरीजों को ठीक होने और काम पर लौटने में कम समय लगता है। इससे मरीजों के अस्पताल में रहने के दिनों में तेजी से कमी आ रही है। आज किसी भी मेजर सर्जरी के बाद भी मरीज दो या तीन दिन में घर लौटने लगा है।

आज दुनिया काफी तेजी से प्रगति कर रही है एवं दिन-प्रतिदिन बदल रही है। ठीक इसी तरह चिकित्सा क्षेत्र भी निरंतर प्रगति कर रहा है एवं बदल रहा है। आज बेहतर दवाइयों एवं नई तकनीकों से हजारों मरीजों की जान बचाई जा रही है, जो पूर्व में संभव नहीं था। आज के इस प्रतिस्पर्धी जीवन में मरीज बेहतर इलाज की अपेक्षा रखते हैं जो कि दर्दरहित, सुरक्षित, शीघ्र एवं किफायती हों।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति) द्वारा ऑपरेशन मरीजों के लिए एक वरदान साबित हुई है। इस शल्य चिकित्सा पद्धति को की-होल सर्जरी या पिनहोल सर्जरी भी कहा जाता है। यह एक अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धति है जिसमें पेट के ऑपरेशन बहुत ही छोटे चीरों (0.5 से 1.सेमी.) के द्वारा संपन्न किए जाते हैं। पहले इन्हीं ऑपरेशनों के लिए 5 से 8 इंच तक के चीरे लगाने की आवश्यकता पड़ती थी।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में मुख्य रूप से एक टेलीस्कोप को वीडियो कैमरा के साथ जोड़ा जाता है। इस टेलीस्कोप को छोटे चीरे के द्वारा (जो कि नाभि के नीचे बनाया जाता है) पेट में डाला जाता है एवं संपूर्ण पेट की सूक्ष्मता से जाँच की जाती है। सर्जन तथा उसकी टीम पेट के अंदर के संपूर्ण चित्र टीवी मॉनीटर पर देखकर ऑपरेशन करते हैं जिससे गलती की संभावना काफी कम रहती है। इस सर्जरी के लिए विशेष लंबे औजारों की आवश्यकता होती है। चूँकि इस सर्जरी में बहुत ही सूक्ष्म चीरे लगाए जाते हैं एवं पेट की मांसपेशियों को नहीं काटा जाता है, अतः मरीज को इस पद्धति से अनेक लाभ हैं।