स्तन कैंसर

  • स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये धारणा सही नहीं है।

  • भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में प्रति एक लाख में से तीस की औसत से इज़ाफ़ा हो रहा है।

  • यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं।

  • स्तन कैंसर को समझना आसान है, स्त्रियां खुद भी स्तन की जांच कर सकती हैं।

  • स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकर या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे (अंडर आर्म्स) भी गांठ होना स्तन कैंसर के संकेत हैं।

  • हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना पकड़ ले इसलिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने वज़न को नियंत्रित रखें, गर्भधारण का समय निश्चित करें और कम-से-कम 6 महीने तक बच्चों को स्तनपान ज़रूर कराएं. ऐसा करने से स्तन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है।

  • स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ़ 5-10 % महिलाओं में ही पाया जाता है।